17 अक्टूबर 2026 - 19:39
सऊदी अरब के पास यमन की शर्तें मानने के अलावा कोई रास्ता नहीं

अनम ने सऊदी अरब के नेतृत्व पर आरोप लगाया कि वह पवित्र धार्मिक स्थलों के नाम का सहारा लेकर यमन के खिलाफ सैन्य कार्रवाई और नाकेबंदी को सही ठहराने की कोशिश कर रहा है।

सनआ : यमन की सुप्रीम पॉलिटिकल काउंसिल के सलाहकार मोहम्मद ताहिर अनम ने कहा है कि सऊदी अरब को यमन के साथ जारी संघर्ष खत्म करने के लिए उसकी शर्तें माननी होंगी। उन्होंने आरोप लगाया कि रियाद झूठे दावों और राजनीतिक प्रचार के जरिए अपनी नाकामियों को छिपाने की कोशिश कर रहा है।

मोहम्मद ताहिर अनम ने आज दिए बयान में सऊदी अरब पर आरोप लगाया कि वह मक्का और मदीना स्थित पवित्र स्थलों के धार्मिक महत्व का इस्तेमाल राजनीतिक और मीडिया अभियानों में कर रहा है। उनके मुताबिक, इसका मकसद मुस्लिम समुदाय की भावनाओं को भड़काना और यमन में अपनी नाकामियों पर पर्दा डालना है।

अनम ने सऊदी अरब के नेतृत्व पर आरोप लगाया कि वह पवित्र धार्मिक स्थलों के नाम का सहारा लेकर यमन के खिलाफ सैन्य कार्रवाई और नाकेबंदी को सही ठहराने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब की नीतियों के कारण संघर्ष खत्म होने के बजाय और लंबा खिंच रहा है।
यमनी अधिकारी ने दावा किया कि यमन के साथ टकराव में सऊदी अरब को सफलता नहीं मिली है। उन्होंने आरोप लगाया कि रियाज़ अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए अमेरिका और इस्राईल का समर्थन हासिल करने, सैन्य और खुफिया सहायता लेने तथा समुद्री और सैन्य गठबंधन बनाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, उनके अनुसार सऊदी अरब को इन प्रयासों से अपेक्षित सफलता नहीं मिली है।
अनम ने कहा कि सऊदी अरब को अपनी नीतियों पर फिर से विचार करना चाहिए और यमन के खिलाफ कार्रवाई रोकने तथा नाकेबंदी खत्म करने की दिशा में कदम उठाने चाहिए। उन्होंने दावा किया कि यमन पर दबाव डालकर उसे अपने रुख से पीछे हटने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
यमन के इस अधिकारी ने कहा कि सऊदी अरब, यमन पर मक्का और मदीना के पवित्र स्थलों को निशाना बनाने का आरोप लगाकर मुस्लिम देशों की जनता की भावनाओं को प्रभावित करना चाहता है। उनके अनुसार, धार्मिक स्थलों का इस्तेमाल राजनीतिक और मीडिया उद्देश्यों के लिए करना गैर-जिम्मेदाराना कदम है।
उन्होंने आगे कहा कि ऐसे आरोपों से अरब और इस्लामी देशों में सऊदी अरब की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंच सकता है। अनम के मुताबिक, धार्मिक भावनाओं को भड़काने या जनमत को प्रभावित करने से यमन में संघर्ष की वास्तविक स्थिति नहीं बदली जा सकती।

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